मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में रचा इतिहास , जानिए कुछ खास बातें,

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अभी हाल ही मे साइखोम मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच हैं उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए पहला सिल्वर मेडल जीत लिया है.मीराबाई चानू ने 49 किलोग्राम महिला वर्ग के वेटलिफ्टिंग इवेंट में सिल्वर पदक अपने नाम किया है.मीराबाई चानू मणिपुर की राजधानी इम्फाल की रहने वाली हैं जों भारत के नार्थ ईस्ट मे आता हैं.मीराबाई के पदक जीतने पर देश का सर ऊंचा करने के लिए प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति सभी ने उनको बधाई दी.इसी बीच एक्टर मिलिंद सोमन की पत्नी अंकिता कोंवर ने नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर मीराबाई चानू से जोड़ते हुऐ टिप्पणी की हैं.अंकिता ने अपने ट्विटर हैंडल और इंस्टाग्राम दोनों पर एक पोस्ट शेयर की है जिसमें उन्होंने नॉर्थ उन्होंने लिखा कि अगर आप भारत के नॉर्थ ईस्ट इलाके से आते हैं तो आप भारतीय तभी बन सकते हैं जब देश के लिए कोई मेडल जीतें.नहीं तो हमें चिंकी चाइनीज़ नेपाली और आजकल नए नाम कोरोना से पहचाना जाता है. भारत में सिर्फ जातिवाद ही नहीं नस्लवाद भी है. और ये मैं अपने अनुभव से कह रही हूं.उनकी इस बात को अनदेखा नहीं किया जा सकता उनकी इस टिप्पणी पर कई लोगो की सहमति भी दिखाई दी हैं अगर आपके आस पास कोई नार्थ ईस्ट का व्यक्ति रहता हैं तो जों शब्द अंकिता ने कहे हैं उन शब्दो से आप पहले से वाखिफ ज़रूर होंगे.इससे भी मणिपुर की रहने वाली एक अभिनेत्री लिन लैशराम ने मैरी कॉम की बायोपिक पर सवाल खड़े किये थे .लिन लैशराम ने कहा था फिल्म मैरी कॉम में प्रियंका चोपड़ा ने जो मुख्य भूमिका निभाई थी उसको पूर्वोत्तर का कोई भी व्यक्ति कर सकता था लिन लैशराम ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म मैरी कॉम में सहायक भूमिका निभाई थीफिल्म मैरी कॉम में 6 बार की वर्ल्ड चैंपियन भारतीय मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम की वास्तविक जीवन की यात्रा दिखाई गई है फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे मणिपुर की एक महिला महिला मुक्केबाज वर्ल्ड चैंपियन बनती है.नस्लभेदभाव का अस्तित्व काफी पुराना हैं इससे इंकार नहीं किया जा सकता नार्थ ईस्ट के लोगो के साथ हिंदी प्रदेशो मे हमेशा से भेदभाव की घटनाएं देखने को मिलती रहती भारत के लोग इतने बुद्धिमान हैं वो सकल देखकर लोगो की नेशनल्टी बता देते हैं उनको नश्ल बता देते हैं पूर्वोत्तर भारत यानी असम मेघालय मणिपुर, मिज़ोरम अरूणाचल प्रदेश त्रिपुरा नागालैंड और सिक्किमयहां के लोगो के साथ हमेशा हिंदी प्रदेशो मे घटिया मज़ाक होता आ रहा हैं अक्सर नार्थ ईस्ट के लोगो के साथ इस तरह की वारदात होती हैं जहां उनके पर नश्लये टिप्पणी की जाती हैं अपने ही देश मे उनको पराया समझा जाता हैं अजीब अजीब नाम से उनको पुकारा जाता हैं.कल्पना की जा सकती हैं जब अपने ही देश मे अपने ही लोगो के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाय तो हम समझ सकते हैं कितनी पीड़ा होंगी.