गरिमा मेहरा दसौनी- क्या ऊर्जा मंत्री का फ्री बिजली देने का वायदा जुमला था ?

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देहरादून : उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रदेश मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत पर बड़ा हमला बोला। दसौनी ने कहा की उत्तराखंड की प्रचंड बहुमत की सरकार ने तीन मुख्यमंत्री बदल दिए लेकिन मंत्रियों ने अपना रवैया जस का तस रखा हुआ है। आगे गरिमा कहती है कि प्रचंड बहुमत की सरकार के मंत्रियों को अपने हलके बयानों से बाज़ आने की बेहद ज़रूरत है। जिस तरह से ऊर्जा मंत्री हरक सिंह रावत ने अपने फ्री बिजली वाले बयान पर यू-टर्न लिया है और बैकफुट पर आते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। इससे भाजपा का चाल चरित्र चेहरा ही उजागर होता है। उत्तराखंड की जनता को अपमानित करने का अधिकार किसी को भी नहीं है। यदि मंत्री महोदय की फ्री बिजली वाली घोषणा एक जुमला थी तो उन्हें उत्तराखंड की प्रबुद्ध जनता से माफ़ी माँगनी चाहिए। दसोनी ने कहा कि मंत्री महोदय यह कहते हुए पाए जा रहे हैं कि उन्होंने बैठक के दौरान अपने अधिकारियों से फ्री बिजली पर चर्चा मात्र की थी और ऐसी कोई घोषणा प्रदेश की जनता के लिए नहीं की थी। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है, यदि मंत्री महोदय की मानी जाए और यह समझा जाए कि यह चर्चा केवल विभागीय बैठक के दौरान हुई तो उन लोगों पर कार्यवाही होनी चाहिए जिन लोगों ने इस गोपनीय चर्चा को सार्वजनिक कर दिया। यदि स्वयं मंत्री महोदय ने कोरी वाहवाही लूटने के लिए इस तरह की घोषणा की तो यह अपने आप में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है ।
दसोनी ने सवाल उठाया कि आखिर बार-बार लगातार सरकार के मंत्री जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ क्यों कर रहे हैं? दसोनी ने कहा कि इससे पहले सतपाल महाराज ने हरिद्वार में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बात कही जिसे सिरे से शासकीय प्रवक्ता ने नकार दिया और सतपाल महाराज को बैकफुट पर आना पड़ा। अब हरक सिंह जी का फ्री बिजली का प्रकरण। जिसने पूरे उत्तराखंड की सियासत को गरमाने का काम किया है तो स्वयं मंत्री महोदय अपनी जुबान से मुकर गए हैं ।
दसौनी ने कहा इसे उत्तराखंड का दुर्भाग्य ही कहा जा सकता है की हल्की बयानबाजी करने वाले और उत्तराखंड की भोली-भाली जनता का मजाक उड़ाने वाले लोग आज सत्तासीन है। दसौनी ने भाजपा के उस दावे को भी हास्यास्पद करार किया , जिसमें भाजपा ने धामी के युवा चेहरे पर आगामी चुनाव लड़ने और 60 पार का नारा देने की बात कही है। भाजपा चाहे युवा चेहरा दे, बुजुर्ग चेहरा दे या महिला का चेहरा दे। उत्तराखंड की जनता तो परिवर्तन का मन बना चुकी है। उत्तराखंड की जनता अपने दुख और परेशानी के वह दिन नहीं भूल सकती, जब उसे कोरोना संकटकाल में बेड , दवाई , इंजेक्शन , ऑक्सीजन, वेंटिलेटर के लिए दुहाई मांगनी पड़ रही थी। उत्तराखंड का युवा अपना उत्पीड़न नहीं भूल सकता। मातृशक्ति जिस का अपमान भाजपा के नेताओं ने किया। वह अपने छाले नहीं भूल सकती। किसान अपनी दुर्दशा नहीं भूल सकते। जिस भाजपा ने महंगाई और बेरोजगारी में उत्तराखंड को शीर्ष स्थान पर पहुंचा दिया हो। वह आज 60 सीटें जीतने का दावा कर रही है। यह अपने आप में मुंगेरीलाल के हसीन सपने ही दिखाई पड़ते हैं। दसौनी ने कहा कि शायद भाजपा प्रदेश की ज़मीनी हकीकत से वाकिफ नहीं है , आज प्रदेश का युवा अवसाद ग्रस्त है। पंडा पुरोहित सड़कों पर आ चुका है। मातृशक्ति न्याय के लिए तड़प रही है। 20 से ज्यादा किसान आत्महत्या कर चुके हैं। भू-कानून के रूप में काला अध्यादेश प्रदेश के ऊपर थोपने का काम भाजपा ने किया है। जिसके खिलाफ आज प्रदेश का युवा वर्ग लामबंद है। ऐसे में भाजपा शायद दिन में ख्वाब देख रही है।