प्रधानमंत्री मोदी का नारा “अबकी बार ट्रम्प सरकार की निकली हवा”, -लेखक: सैफ जाफ़री

Spread the love

 

22 सितंबर 2019. अमेरिका के टेक्सास राज्य का ह्यूस्टन शहर. कार्यक्रम था ‘हाऊडी मोदी’. अमिरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री मोदी मंच पर थे. भाषणों का दौर चल रहा था. कार्यक्रम में हज़ारों की भीड़ ने ये सोचकर हिस्सा लिया था कि शायद कोई काम की बात हो.
पीएम मोदी का भाषण सुनकर भारतीय चुनाव की याद आ गई थी. यहां भी ऐसा लग रहा था जैसे पीएम मोदी किसी चुनावी जनसभा में भाषण देने आए हों. ट्रम्प मंच पर खड़े थे. शायद कोशिश रही हो कि प्रधानमंत्री मोदी के लोकलुभावन भाषण से अमेरिका में रह रहे भारतीय मूल के लाखों लोग ट्रम्प की जय जयकार करने लगें. कोशिश तो बहुत की गई. कोरोना काल में मलेरिया की दवाई पर भारत को धमकी देने वाले ट्रम्प को प्रधानमंत्री मोदी ने भारत का दोस्त बता दिया. ये दो देशों की चर्चा थी या चुनाव जीतने के लिए दो नेताओं की चर्चा ? ये आज भी एक रहस्य है.

लेखक: सैफ जाफ़री (लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने अतिउत्साहित होकर भारत के 2014 के चुनाव का भाजपा के नारे को अमेरिका में दोहरा दिया और बोल दिया – “अबकी बार ट्रम्प सरकार”. लेकिन चुनाव नतीजे तो कुछ और आए हैं. ट्रम्प साहब हार गए. जो बिडेन अब अमेरिका के नए राष्ट्रपति हैं.
अबकी बार तो जो बिडेन की सरकार है. ट्रम्प साहब की सरकार तो अब रही नहीं.

ट्रम्प साहब की सरकार नहीं रही तो ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम कौन कराएगा अब ? वैसे ट्रम्प साहब राष्ट्रपति नहीं रहे तो कोई बात नहीं. कमला हैरिस तो भारतीय मूल की हैं. कोई न कोई रिश्तेदारी निकल ही जाएगी. लेकिन भारत ट्रम्प साहब को बहुत ‘मिस’ करेगा. करना भी चाहिए. पूरे 100 करोड़ रुपये खर्च किया ट्रम्प साहब को ‘नमस्ते’ करने के लिए. कितना बड़ा स्टेडियम था. हज़ारों-लाखों की भीड़ थी. उस भीड़ में एक व्यक्ति ने भी पैसा नहीं लिया था. वो तो ट्रम्प साहब को ‘नमस्ते’ करने आये थे. लेकिन ट्रम्प साहब तो ‘गुड नाईट’ बोलकर निकल लिए. कितनी तैयारी थी. हमने दीवार भी खड़ी की, उस पर ‘वेलकम ट्रम्प’ भी लिखा. जो बिडेन ने सब गुड़ का गोबर कर दिया.

जो बिडेन का व्यवहार पता नही कैसा होगा. ट्रम्प साहब का व्यवहार तो अच्छा था बस थोड़े शर्मीले थे. लेकिन उनका वो व्यवहार आज तक समझ नहीं आया कि जब भारत ने 100 करोड़ रुपये खर्च कर उनको ‘नमस्ते’ किया और अमेरिका जाकर उन्होंने हमारे प्रधानमंत्री मोदी साहब को ट्विटर से ‘अनफॉलो’ कर दिया. फिर बाद में मलेरिया की दवाई के लिए धमकी दे डाली. ये वाक़ई बहुत पीड़ा दायक था. ऐसे कोई कैसे कर सकता है ?. ऐसा तो हमारे मौहल्ले के बच्चे भी नहीं करते.100 करोड़ पर पानी फेर दिया. मुझे तो ट्रम्प का हारना भारतीयों की बद्दुआ लगता है.
ख़ैर… राष्ट्रपति तो बनते बदलते रहते हैं. साहब के संबंध जो बिडेन के साथ भी ठीक ठाक हैं.

ये लोग वैसे ही तफरी ले रहे हैं. हर बात में साहब की टांग खिंचाई करते हैं. हम भी इनकी बातों में आ गए थे. लेकिन असली बात तो रात दुकान पर चाय वाले चचा ने बताई. बात 1965 के आस पास की थी. तब जो बाइडेन का नाम जय सिंह बद्री था. अहमदाबाद के स्टेशन पर चाय बेचा करते थे. बद्री गोरे चिट्ठे थे बिल्कुल अंग्रेज़ लगते थे. एक दिन ट्रेन में अंग्रेज़ लोग आए तो बद्री को अपने साथ ले गए. अमेरिका जाकर अपना बद्री जय सिंह बन चुका था जो बिडेन. कितने गर्व की बात है हमारे लिए. अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर कुछ शक्ति तो ज़रूर है. या फिर शक्ति ‘चाय’ में भी हो सकती है. प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनाने की फैक्ट्री समझ लीजिए. यक़ीन न हो तो आप भी अहमदाबाद स्टेशन पर चाय बेचकर देखिये.