शिक्षक दिवस पर जानिए डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में कुछ खास बातें

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डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी गांव में हुआ था।डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पिता का नाम सर्वपल्ली वीरास्वामी था और उनकी माता का नाम सीताम्मा था। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव तिरूतनी से ही ग्रहण की थी। उन्होंने साल 1906 में एमए किया था। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने जिस कॉलेज से एमए किया था उसी कॉलेज का इन्हें उपकुलपति बना दिया गया था। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन आज़ाद भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 13 मई 1952 से लेकर 13 मई 1962 तक देश का उपराष्ट्रपति पद संभाला था। फिर 13 मई 1962 को कि वह देश के दूसरे राष्ट्रपति बना दिए गए। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपने जीवन के 40 साल एक शिक्षक बनकर गुजारे थे।डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को हमेशा एक आदर्श शिक्षक के रूप में याद किया जाता है। इनका मानना था कि शिक्षकों का दिमाग देश में सबसे तेज़ और अच्छा होना चाहिए क्योंकि देश को बनाने में शिक्षकों का ही सबसे बड़ा योगदान होता है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन हमेशा से श्रेष्ठ गुणों वाले व्यक्ति रहे थे। इसी के चलते भारत सरकार ने इन्हें साल 1954 में देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था। साथ ही डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के पहले व्यक्ति थे जिन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का निधन 17 अप्रैल 1965 को एक लंबी बीमारी के चलते हुआ था। शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम हमेशा याद किया जाता है। इन्हीं की याद में और इनकी जयंती पर यानी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।पूरे देश में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाकर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रति सम्मान व्यक्त किया जाता है। साथ ही इन्हें अमेरिकी सरकार ने टेंपलटन पुरस्कार से सम्मानित किया था। यह पुरस्कार धर्म के क्षेत्र में उत्थान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ऐसे इकलौते गैर ईसाई समुदाय के व्यक्ति थे।